क्या यीशु ही मसीह है?
हम अक्सर यीशु के बारे में और इस बात के बारे में सुनते हैं कि उसने हमारे लिए क्रूस पर मरकर हमें बचाया। और जो कोई उस पर विश्वास करता है, उसके पास अनन्त जीवन है।
हमारे जीवन को बचाना – यही प्रतीक्षित मसीह की भूमिका है... परन्तु क्या यीशु ही सच्चा मसीह है, या हमें किसी और की प्रतीक्षा करनी होगी?
चुने हुए के बारे में, यानी उसके बारे में जो हम सबको बचाएगा, अधिकांश जानकारी हमें यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक से मिलती है, जो लगभग ईसा पूर्व 8वीं शताब्दी में रहा और भविष्यवाणी करता रहा। मोटे तौर पर, यह यीशु के जन्म से 700 वर्ष पहले की बात थी।
1यिशै की जड़ से एक कोंपल निकलेगी;और एक डाली फलवंत होगी.2यहोवाह का आत्मा,बुद्धि और समझ का आत्मा,युक्ति और सामर्थ्य का आत्मा,ज्ञान और समझ का आत्मा—3उनके सुख का मूल यहोवाह के प्रति पवित्र भय में होगा.वे मुंह देखकर न्याय नहीं करेंगे,और न सुनी हुई बातों के अनुसार निर्णय लेंगे;4वे तो कंगालों का न्याय धर्म से,और पृथ्वी के नम्र लोगों का न्याय सच्चाई से करेंगे.वे अपने मुंह के शब्द से पृथ्वी पर हमला करेंगे;और अपनी फूंक से दुष्टों का नाश कर देंगे.5धर्म उनका कटिबंधऔर सच्चाई उनकी कमर होगी.( यशायाह 11:1-5 )
हम आशा करते हैं कि मसीह राजा दाऊद का वंशज होगा…
1“मेरे इन सेवक को देखिये, जिनसे मैं आनंदित हूं,वह मेरे चुने हुए हैं, मेरे प्रिय;उन पर मैंने अपना आत्मा रखा है,वही देशों का निष्पक्ष न्याय करेंगे.2वह न तो चिल्लाएंगे और न ऊंचे शब्द से बोलेंगे,और न सड़क में उनका शब्द सुनाई देगा.3कुचले हुए नरकट को वह तोड़कर नहीं फेंकेंगे,और न ही वह टिमटिमाती बत्ती को बुझा देंगे.वह सच्चाई से न्याय करेंगे;4जब तक वह न्याय को पृथ्वी पर स्थिर न करेंवह न तो निराश होंगे न थकेंगे.द्वीप उनकी व्यवस्था की प्रतीक्षा करेंगे.”5परमेश्वर, जो यहोवाह हैं—जिन्होंने आकाश बनाया तथा पृथ्वी को बढ़ाया और फैलाया,जो पृथ्वी पर पाए जाते हैं,जिन्होंने पृथ्वी के लोगों को श्वासऔर जीवन उस पर चलने वालों को दिया:6“मैं ही, वह यहोवाह हूं, मैंने धर्म से आपको बुलाया है;मैं आपका हाथ थाम कर आपकी देखभाल करूंगा.मैं आपको लोगों के लिए वाचाऔर देशों के लिए ज्योति ठहराऊंगा,7ताकि अंधे देख पाएं,बंदी कारागार से बाहर लाया जाएंजो कारागार के अंधकार में रहते हैं.( यशायाह 42:1-7 )
यहाँ हम देखते हैं कि “सेवक” नम्र होगा, सबके सामने अपनी आवाज़ ऊँची नहीं करेगा, और अंधों की आँखें खोलेगा…
यशायाह अपनी पुस्तक में उसके बारे में और क्या बताता है? दूसरे लोग मसीह के साथ कैसा व्यवहार करेंगे? उसके साथ क्या हुआ और हमारे लिए उसका क्या अर्थ है? इसका उत्तर देने के लिए यशायाह भविष्य में आगे बढ़ता है और सीधे हमसे उस मसीह के बारे में बात करता है जिसे हम पहले ही ठुकरा चुके हैं।
1किन व्यक्ति ने हमारी बातों पर विश्वास कियाऔर यहोवाह की भुजा किस पर प्रकट हुई है?2क्योंकि वह पुरुष यहोवाह के सामने अंकुर के समानऔर ऐसे उगे जैसे सूखी भूमि से निकले हों.उनका रूप न तो सुंदर था न प्रभावशाली कि हमें अच्छा लगे,न ही ऐसा रूप कि हम उनकी ओर देखते.3वह तो मनुष्यों द्वारा तुच्छ जाने जाते तथा त्यागे हुए थे,वह दुःखी पुरुष थे, और दर्दों से परिचित थे.उन व्यक्ति के समान जिन्हें देखकर लोग अपना मुंह छिपा लेते हैंवह तुच्छ जाने गए, और हमने उनके महत्व को न जाना.4निश्चय ही उन्होंने हमारे दर्दों को सह लियाऔर हमारे दुखों को अपने ऊपर उठा लिया,तौभी हमने उन्हें परमेश्वर द्वारा दंडित,उन्हीं के द्वारा पीड़ित और व्यथित समझा.5परंतु वह तो हमारे ही अपराधों के कारण छेदे गए,हमारे ही अधर्म के कामों के कारण वह कुचले गए;हमें शांति देने वाली सजा उन पर आयी.और उनके कोड़े खाने के द्वारा हम लोग चंगे हो गए.6हम सभी भेड़ों के समान भटक गए थे,हममें से हर एक ने अपना मनचाहा मार्ग अपना लिया था;किंतु यहोवाह ने हम सभी का अधर्मउन्हीं पर लाद दिया.7वह उत्पीड़ित और वह सताए गए,फिर भी उन्होंने अपना मुंह नहीं खोला;वध के लिए ले जाए जा रहे मेमने के समान उन्हें ले जाया गया,तथा जैसे ऊन कतरनेवाले के सामने भेड़ शांत रहती है,वैसे ही उन्होंने भी अपना मुंह नहीं खोला.8अत्याचार53:8 अत्याचार या गिरफ्तार. करके और दोष लगाकर उन्हें ले जाया गया, फिर भी उनकी पीढ़ी के किस व्यक्ति ने इसका प्रतिवाद किया?उन्हें दंड दिया गया.क्योंकि वह जीवितों के बीच में से उठा लिये गए;मेरे ही लोगों के अपराधों के कारण वे दंडित किए गए.9उनकी कब्र दुष्ट व्यक्तियों के साथ ठहराई गई,फिर भी अपनी मृत्यु के समय वह एक धनी व्यक्ति के साथ थे,क्योंकि न तो उनसे कोई हिंसा हुई थी,और न उनके मुंह से कोई छल की बात निकली.10तौभी यहोवाह की यह इच्छा थी कि उन्हें कुचलें कि वह पीड़ित हों,और यद्यपि यहोवाह उनके चुने हुए सेवक के प्राण को पाप के लिए एक बलिदान पेश करते हैं,वह अपने वंश को देखने पाएंगे और वह बहुत दिनों तक जीवित रहेंगे,तथा इससे यहोवाह की इच्छा उनके राष्ट्र में समृद्ध होगी.11और वह अपने प्राणों का दुःख उठाकरउसे देखेंगे और संतोष पाएंगे;अपने ज्ञान के द्वारा वह जो धर्मी व्यक्ति हैं,मेरे सेवक अनेक लोगों को धर्मी बनाएंगे,क्योंकि वही उनके अधर्मों का बोझ उठाएंगे.12अतः मैं उन्हें महान लोगों के साथ एक भाग दूंगा,वह लूटी हुई चीज़ों को सामर्थ्यी व्यक्तियों में बांट देंगे,क्योंकि उन्होंने अपने प्राण को मृत्यु के लिए ढाल दिया,और उनकी गिनती अपराधियों में की गई.फिर भी उन्होंने अनेक लोगों के पाप का बोझ उठाया,और अपराधियों के लिए मध्यस्थता की!( यशायाह 53:1-12 )
हम देखते हैं कि ठुकराया हुआ और तुच्छ जाना गया मसीह वध किए गए मेम्ने के समान हमारे पापों के लिए मरा। वह बिना वंशजों के मरा, फिर भी वह “दीर्घायु होगा” और “उसके बहुत से वंशज होंगे”। इसका सम्भवतः यह अर्थ है कि मसीह अपनी मृत्यु के बाद, पृथ्वी पर या स्वर्ग में, जी उठेगा और उसकी सन्तान होगी, शारीरिक या आत्मिक।
अब, अपने लिए एक अभ्यास के रूप में, और यह तय करने के लिए कि क्या यीशु ही प्रतीक्षित मसीह है, यीशु मसीह के बारे में मत्ती, मरकुस और यूहन्ना की गवाहियाँ पढ़िए, जिन्होंने अपने जीवन का बड़ा भाग यीशु के साथ बिताया, और वैद्य लूका की भी, जिसने नासरी यीशु मसीह के जीवन के तथ्यों को बड़ी सावधानी से इकट्ठा किया…